शाम के साये में ज़िंदगी अक्सर
लिपट जाती है,
आस, फिर एक सुबह का लम्हा घटा जाती है..!
गौर कर रहे हैं गए दिनों से...;
अफ़साना ढूंढ़ना चाहता है दिल किसी रहगुज़र से;
आस, फिर एक सुबह का लम्हा घटा जाती है..!
गौर कर रहे हैं गए दिनों से...;
अफ़साना ढूंढ़ना चाहता है दिल किसी रहगुज़र से;
ना जाने कौन सी आहटें बसीं हैं इन ख़्वाबों में..,
कि रातों को अचानक नींद सी उचट जाती है..!!
तारुफ़ जिन पलों का हम ज़िंदगी से ना कर सकें;
वो ख़ामोशी जिसे हंसी में ना उड़ा सके..;
ये दिल जो कभी रहा अपना हमदम,...
चुप गुम सा हो गया है,,'बोलना जिसका बाकी है!!
कहता है मेरा दिल...'मेरे एहबाब..;
हो कोई जो अब मेरे हर हाल से वाक़िफ़ हो..;
कोई,...'जो सुने मेरी उम्र भर का रियाज़ ...
सिमटे पलों की वो कहानी..'जो कहनी बाकी है.!!
उम्मीदों से परे' मुझे अब कोई तो ढूंढे..
...किसी की अब सोच-तलाश में रहे हरसूँ हम...
आते मौसम की रुत में जो दे सुकून हस्सास पल...
..आफ़ताब की तरह जिनका मुस्कुराना बाकी है..!!.
कुछ ही अल्फ़ाज़ों में समेटा है मैने इन असफ़ज़ाई ख़्वाबों को..;
कि,,'अभी ज़िंदगी की किताब में एहसासों की तफ़सीर बाकी है…!!
कि रातों को अचानक नींद सी उचट जाती है..!!
तारुफ़ जिन पलों का हम ज़िंदगी से ना कर सकें;
वो ख़ामोशी जिसे हंसी में ना उड़ा सके..;
ये दिल जो कभी रहा अपना हमदम,...
चुप गुम सा हो गया है,,'बोलना जिसका बाकी है!!
कहता है मेरा दिल...'मेरे एहबाब..;
हो कोई जो अब मेरे हर हाल से वाक़िफ़ हो..;
कोई,...'जो सुने मेरी उम्र भर का रियाज़ ...
सिमटे पलों की वो कहानी..'जो कहनी बाकी है.!!
उम्मीदों से परे' मुझे अब कोई तो ढूंढे..
...किसी की अब सोच-तलाश में रहे हरसूँ हम...
आते मौसम की रुत में जो दे सुकून हस्सास पल...
..आफ़ताब की तरह जिनका मुस्कुराना बाकी है..!!.
कुछ ही अल्फ़ाज़ों में समेटा है मैने इन असफ़ज़ाई ख़्वाबों को..;
कि,,'अभी ज़िंदगी की किताब में एहसासों की तफ़सीर बाकी है…!!



